गीतायां कृ-धातुः (2)

It has been on my mind to compile together all words in गीता, which have relevance or etymology from a particular धातु as कृ. Such compilation presents a vast canvas of styles of word-formation in संस्कृत. That was also an important idea in this गीतान्वेषणम् i.e. study of गीता and संस्कृत together.

I must acknowledge that Rao Bahadur Prahlad Divanji’s compilation of Critical Word Index to the Bhagavadgita makes it easy to compile all words from a particular धातु. Here I plan to compile words from कृ-धातुः.

Before that, a study of the कृ-धातु itself. In धातुपाठ, (1) कृ । भ्वा० अनिट् उ० । (कृ॒ञ् कर॑णे) १.१०४८ (2) कृ । स्वा० अनिट् उ० । कृ॒ञ् हिं॒साया॑म् ५.७ ॥ (3) कृ । त० अनिट् उ० । डुकृ॒ञ् कर॑णे ८.१० ॥

However rarely one finds कृ भ्वा० अनिट् उ०. In Apte’s online dictionary one gets –कृ I. 5 U. (कृणोति-कृणुते) To hurt, injure, kill. -II. 8 U. (करोति-कुरुते, चकार-चक्रे, अकार्षीत्-अकृत; कर्तुम्, करिष्यति-ते कृत) 1 To do (in general); तात किं करवाण्यहम् -2 To make; गणिकामवरोधमकरोत् Dk; नृपेण चक्रे युवराजशब्दभाक् R.3.35; युवराजः कृतः &c. -3 To manufacture, shape, prepare; कुम्भकारो घटं करोति; कटं करोति &c. -4 To build, create; गृहं कुरु; सभां कुरु मदर्थे भोः. -5 To produce, cause, engender; रतिमुभयप्रार्थना कुरुते Ś.2.1.-6 To form, arrange; अञ्जलिं करोति; कपोतहस्तकं कृत्वा. -7 To write, compose; चकार सुमनोहरं शास्त्रम् Pt.1. -8 To perform, be engaged in; पूजां करोति.-9 To tell, narrate; इति बहुविधाः कथाः कुर्वन् &c. -10 To carry out, execute, obey; एवं क्रियते युष्मदादेशः Māl.1; or करिष्यामि वचस्तव or शासनं मे कुरुष्व &c. -11 To bring about, accomplish, effect; सत्सं- गतिः कथय किं न करोति पुंसाम् Bh.2.23. -12 To throw or let out, discharge, emit; मूत्रं कृ to discharge urine, make water; so पुरीषं कृ to void excrement. -13 To assume, put on, take; स्त्रीरूपं कृत्वा; नानारूपाणि कुर्वाणः Y.3. 162. -14 To send forth, utter; मानुषीं गिरं कृत्वा, कलरवं कृत्वा &c. -15 To place or put on (with loc.); कण्ठे हारमकरोत् K.212; पाणिमुरसि कृत्वा &c. -16 To entrust (with some duty), appoint; अध्यक्षान् विविधान्कुर्यात्तत्र तत्र विपश्चितः Ms.7.81. -17 To cook (as food) as in कृतान्नम्. -18To think, regard, consider; दृष्टिस्तृणीकृतजगत्त्रयसत्त्वसारा U.6. 19. -19 To take (as in the hand); कुरु करे गुरुमेकमयोघनं N.4.59. -20 To make a sound, as in खात्कृत्य, फूत्कृत्य भुङ्क्ते; so वषट्कृ, स्वाहाकृ &c. -21 To pass, spend (time); वर्षाणि दश चक्रुः spent; क्षणं कुरु wait a moment. -22 To direct towards, turn the attention to, resolve on; (with loc. or dat.); नाधर्मे कुरुते मनः Ms.12.118; नगरगमनाय मतिं न करोति Ś.2. -23 To do a thing for another (either for his advantage or injury); प्राप्ताग्निनिर्वापणगर्वमम्बु रत्नाङ्- कुरज्योतिषि किं करोति Vikr.1.18; यदनेन कृतं मयि, असौ किं मे करिष्यति &c. -24 To use, employ, make use of; किं तया क्रियते धेन्वा Pt.1. -25 To divide, break into parts (with adverbs ending in धा); द्विधा कृ to divide into two parts; शतधा-कृ, सहस्रधा-कृ &c. -26To cause to become subject to, reduce completely to (a particular condition, with adverbs ending in सात्); आत्मसात्-कृ to subject or appropriate to oneself; दुरितैरपि कर्तुमात्मसात्प्रयतन्ते नृपसूनवो हि यत् R.8.2; भस्मसात्-कृ to reduce to ashes. -27 To appropriate, secure for oneself. -28 To help, give aid. -29 To make liable. -30To violate or outrage (as a girl). -31 To begin. -32 To order. -33 To free from.-34 To proceed with, put in practice. -35 To worship, sacrifice. -36 To make like, consider equal to, cf. तृणीकृ (said to be Ātm. only in the last 1 senses). -37To take up, gather; आदाने करोतिशब्दः Ms.4.2.6; यथा काष्ठानि करोति गोमयानि करोति इति आदाने करोतिशब्दो भवति एवमिहापि द्रष्टव्यम् ŚB. on MS.4.2.6. This root is often used with nouns, adjectives, and indeclinables to form verbs from them, somewhat like the English affixes ‘en’ or ‘(i) fy’, in the sense of ‘making a person or thing to be what it previously is not’; e. g. कृष्णीकृ to make that which is not already black, black, i. e. blacken; so श्वेतीकृ to whiten; घनीकृ to solidify; विरलीकृ to rarefy &c. &c. Sometimes these formations take place in other senses also; e. g. क्रोडीकृ ‘to clasp to the bosom’, embrace; भस्मीकृ to reduce to ashes; प्रवणीकृ to incline, bend; तृणीकृ to value as little as straw; मन्दीकृ to slacken, make slow; so शूलीकृ to roast on the end of pointed lances; सुखीकृ to please’ समयाकृ to spend time &c.N. B.- This root by itself admits of either Pada; but it is Ātm. generally with prepositions in the following senses :–(1) doing injury to; (2) censure, blame; (3) serving; (4) outraging, acting violently or rashly; (5) preparing, changing the condition of, turning into; (6) reciting; (7) employing, using; see P.I.3.32 and गन्धनावक्षेपणसेवनसाहसिक्यप्रतियत्नप्रकथनोपयोगेषु कृञः ”Stu- dents’ Guide to Sanskrit Composition” 338. Note. The root कृ is of the most frequent application in Sans- krit literature, and its senses are variously modified, or almost infinitely extended, according to the noun with which the root is connected; e. g. पदं कृ to set foot (fig. also); आश्रमे पदं करिष्यसि Ś.4.19; क्रमेण कृतं मम वपुषि नव- यौवनेन पदम् K.141; मनसा कृ to think of, meditate; मनसि कृ to think; दृष्ट्वा मनस्येवमकरोत् K.136; or to resolve or determine; सख्यम्, मैत्रीं कृ to form friendship with; अस्त्राणि कृ to practise the use of weapons; दण्डं कृ to inflict punishment; हृदये कृ to pay heed to; कालं कृ to die; मतिं-बुद्धिं कृ to think of, intend, mean; उदकं कृ to offer libations of water to manes; चिरं कृ to delay; दर्दुरं कृ to play on the lute; नखानि कृ to clean the nails; कन्यां कृ to outrage or violate a maiden; विना कृ to separate from, to be abandoned by, as in मदनेन विनाकृता रतिः Ku.4.21; मध्ये कृ to place in the middle, to have reference to; मध्येकृत्य स्थितं क्रथकौशिकान् M.5.2; वेशे कृ to win over, place in subjection, subdue; चमत्कृ to cause surprise; make an exhibition or a show; सत्कृ to honour, treat with respect; तिर्यक्कृ to place aside. -Caus. (कारयति-ते) To cause to do, perform, make, execute &c.; आज्ञां कारय रक्षोभिः Bk.8.84; भृत्यं भृत्येन वा कटं कारयति Sk. -Desid. (चिकीर्षति- ते) To wish to do &c.; Śi.14.41.

In this compilation, the words are grouped into Parts A, B, C, D, E, F and G. Logic of grouping is explained at the beginning of Parts B, C, D, E, F and G. All other words are in Part A. In all groups the words are in alphabetical order. What is important is to explore the grammatical and etymological characteristics of the words such as तिङन्त-s कृदन्त-s etc.

Part A-1-1 सुबन्ताः – करणम् 18’14, 18’18 कर्म 2’49, 3’5, 3’8+, 3’9, 3’15, 3’19+, 3’24, 4’9, 4’15+, 4’16+, 4’18, 4’21, 4’23, 4’33, 5’11, 6’1, 6’3, 7’29, 8’1, 16’24, 17’27, 18’3, 18’8, 18’9, 18’10, 18’15, 18’18, 18’19, 18’23, 18’24, 18’25, 18’43, 18’44, 18’47, 18’48 कर्मणः 3’1, 3’9, 4’17+, 14’16, 18’7, 18’12 कर्मणा 3’20, 18’60 कर्मणाम् 3’4, 4’12, 5’1, 14’12, 18’2 कर्मणि 2’47, 3’1, 3’22, 3’23, 3’25, 4’18, 4’20, 14’9, 17’26, 18’45 कर्मभिः 3’31, 4’14 कर्मसु 2’50, 6’4, 6’17, 9’9 कर्माणि 2’48, 3’27, 3’30, 4’14, 4’41, 5’10, 5’14, 9’9, 12’6, 12’10, 13’29, 18’6, 18’11, 18’41 कर्मिभ्यः 6’46 कार्ये 18’22 कारणानि 18’13 क्रियाभिः 11’48 प्रकृतिम् 3’33, 4’6, 7’5, 9’7, 9’8, 9’12, 9’13, 11’51, 13’19, 13’23 प्रकृतिः 7’4, 9’10, 13’20, 18’59 प्रकृतेः 3’27, 3’29, 3’33, 9’8 प्रकृत्या 7’20, 13’29 विकर्मणः 4’17 सङ्करस्य 3’24 सङ्करः 1’42 चिकीर्षुः 3’25

Part A-1-2 तिङन्ताः – करिष्यति 3’33 करिष्यसि 2’33 18’60 करिष्ये 18’73 करोति 4’20, 5’10, 6’1, 13’31 करोमि 5’8 करोषि 9’27 कार्यते 3’5 कुरु 2’48, 3’8, 4’15, 9;34, 12’11, 18’63, 18’65 कुरुते 3’21, 4’37+ कुरुष्व 9’27 कुर्यात् 3’25 कुर्याम् 3’24 कुर्वन्ति 3’25, 5’11 क्रियते 17’18, 17’19, 18’9, 18’24 क्रियन्ते 17’25 अकुर्वत 1’1 नमस्कुरु 9’34, 18’65 भस्मसात्कुरुते 4’37+

Part A-1-3 कृदन्ताः – कर्तव्यम् 3’22 कर्तव्यानि 18’6 कर्ता 3’24, 3’27, 18’14, 18’18, 18’19, 18’26, 18’27, 18’28 कर्तारम् 4’13, 14’19, 18’16 कर्तुम् 1’45, 2’17, 3’20, 9’2, 12’11, 16’24, 18’60 कर्तृत्वम् 5’14 कार्यम् (नाम च कृदन्तं च) 3’17, 3’19, 6’1, 18’5, 18’9, 18’31 कुर्वन् 4’21, 5’7, 5’13, 12’10, 18’47 कुर्वाणः 18’56 कारयन् 5’13 कृतम् 4’15+, 17’18, 18’23 कृतेन 3’18 कृत्वा 2’38, 4’22, 5’27+, 6’12, 6’25, 11’35, 18’8, 18’68 क्रियमाणानि 3’27, 13’29 प्राकृतः 18’28 नमस्कृत्वा 11’35

Part A-2सामासिकशब्दाः तेषु कृ-धातुतः प्रातिपदिकानि च –

(1) कर्मन् कर्मबन्धनैः 9’28 कर्मयोगम् 3’7 कर्मयोगः 5’2+ कर्मयोगेन 3’3, 13’24 कर्मसङ्गिनाम् 3’26 कर्मसङ्गिषु 14’15 कर्मसङ्गेन 14’7 कर्मसमुद्भवः 3’14 कर्मसंग्रहः 18’18 कर्मसंज्ञितः 8’3 कर्मसन्न्यासात् 5’2 कर्मानुबन्धीनि 15’2 अकर्म 4’16, 4’18 अकर्मकृत् 3’5 अकर्मणः 3’8, 4’17 अकर्मणि 2’47, 4’18 उग्रकर्माणः 16’9 कर्मचोदनः 18’18 कर्मजम् 2’51 कर्मजा 4’12, कर्मजान् 4’32 कर्मफलत्यागः 12’12 कर्मफलत्यागी 18’11 कर्मफलप्रेप्सुः 18’27 कर्मफलसंयोगम् 5’14 कर्मफलहेतुः 2’47 कर्मफलम् 5’12, 6’1 कर्मफलासङ्गम् 4’20 कर्मफले 4’14 कर्मबन्धनः 3’9 कर्मबन्धम् 2’39 कर्मेन्द्रियाणि 3’6 कर्मेन्द्रियैः 3’7 गुणकर्मविभागयोः 3’28 गुणकर्मविभागशः 4’13 गुणकर्मसु 3’29 जन्मकर्मफलप्रदाम् 2’43 ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम् 4’19 पुण्यकर्मणाम् 7’28, 18’71 ब्रह्मकर्म 18’42 ब्रह्मकर्मसमाधिना 4’24 प्राणकर्माणि 4’27 मत्कर्मपरमः 12’10 मोघकर्माणः 9’12 यज्ञदानतपःकर्म 18’3, 18’5 योगसंन्यस्तकर्माणम् 4’41सर्वकर्मणाम् 18’13 सर्वकर्मफलत्यागम् 12’11, 18’2 सर्वकर्माणि 3’26, 4’37, 5’13, 18’56, 18’57 स्वकर्मणा 18’46 स्वकर्मनिरतः 18’45 (1-a) नैष्कर्म्य is a तद्धित from निष्कर्म – नैष्कर्म्यसिद्धिम् 18’49 नैष्कर्म्यम् 3’4

(2) कर्तृ अकर्तारम् 4’13, आदिकर्त्रे 11’37 (3) कृत अकृतबुद्धित्वात् 18’16 अकृतात्मनः 15’11 अकृतेन 3’18 असत्कृतम् 17’22 असत्कृतः 11’42 अहंकृतः 18’17 कृतकृत्यः 15’20 कृतनिश्चयः 2’37 कृताञ्जलिः 11’14, 11’35 पुण्यकृतान्/पुण्यकृताम् 6’41 कृतान्ते (Here the component कृत seems to refer to the name of an era कृत, the कृतयुग. It would be interesting to check why the era got its name as कृतयुग.) 18’13 सुकृतदुष्कृते 2’50 सुकृतस्य 14’16 सुकृतम् 5’15 (4) कार्य अकार्यम् 18’31 अविकार्यः 2’25 कार्याकार्यव्यवस्थितौ 16’24 कार्याकार्ये 18’30 (5) क्रिया क्रियाविशेषबहुलाम् 2’43 अक्रियः 6’1 मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः 18’33 यज्ञतपःक्रियाः 17’25 यज्ञदानतपःक्रियाः 17’24 लुप्तपिण्डोदकक्रियाः 1’42 यतचित्तेन्द्रियक्रियः 6’12 (6) कृति 13’20 नानावर्णाकृतीनि 11’5 नैष्कृतिकः 18’28 प्रकृतिजान् 13’21 प्रकृतिजैः 3’5, 18’40 प्रकृतिसंभवान् 13’19 प्रकृतिसंभवाः 14’5 प्रकृतिस्थः 13’21 प्रकृतिस्थानि 15’7 भूतप्रकृतिमोक्षम् 13’34 सुकृतिनः 7’16 (7) कारण आत्मकारणात् 3’13 (8) चिकीर्षु प्रियचिकीर्षवः (9) संकर वर्णसंकरः 1’41 1’23 (10) संकर+कारक वर्णसंकरकारकैः 1’43 (This word वर्णसंकरकारकैः is interesting, because it has two components संकर and कारक both having etymology from कृ-धातुः. Again, संकर may fit in Part B. कारक seems to combine grammatical concepts of both Part C and Part E). (11) कार्य+कारण+कर्तृत्व कार्यकारणकर्तृत्वे 13’29

Part B – There are words containing -कर, which is an उपपदम् used in compound words. अकीर्तिकरम् 2’2 अनुद्वेगकरम् 17’15 कुसुमाकरः 10’35 निःश्रेयसकरौ 5’2 मकरः 10’31 (This word मकरः does not seem to have anything to do with the suffix कर. Or, maybe, there is some relevance.) सुदुष्करम् 6’34

Part C – There are also words containing -कार, which is primarily a घञ्-कृदन्तम् but it is also used as an उपपदम् in a compound word.

Part C-1 with कार as घञ्-कृदन्तम् अधिकारः 2’47 निर्विकारः 18’26 विकारान् 13’19 अनुपकारिणे 17’20 प्रत्युपकारार्थम् 17’21 यद्विकारि 13’3 अप्रतिकारम् 1’46 सविकारम् 13’6

Part C-2 with कार as an उपपदम् in a compound word अकारः 10’33 अनहंकारः 13’8 अहंकारविमूढात्मा 3’27 अहंकारम् 16’18, 18’53, 18’59 अहंकारः 7’4, 13’5 अहंकारात् 18’58 ओंकारः 9’17 कामकारतः 16’23 कामकारेण 5’12 दम्भाहंकारसंयुक्ताः 17’5 निरहंकारः 2’71, 12’13 सत्कारमानपूजार्थम् 17’18

Part D – Whereas कृदन्त-s are words with affixation of कृत्-प्रत्यय-s, the word कृत् itself is obtained by affixation of a कृत्-प्रत्यय क्विप्. In Apte’s dictionary – कृत् a. [कृ-क्विप्] (Generally at the end of comp.) Accomplisher, doer, maker, performer, manufacturer, composer &c.; पाप˚, पुण्य˚, प्रतिमा˚ &c. -m. 1 A class of affixes used to form derivatives (nouns, adjectives &c.) from roots. -2 A word so formed; कृद्ग्रहणे गतिकारक-पूर्वस्यापि ग्रहणम् Paṅ. Śekh. Here in Part D words ending in कृत् – कल्याणकृत् 6’40 कुलक्षयकृतम् 1’38, 1’39 कृत्स्नकर्मकृत् 4’18 पापकृत्तमः 4’36 प्रियकृत्तमः 18’69 मत्कर्मकृत् 11’55 लोकक्षयकृत् 11’32 वेदान्तकृत् 15’15

Part E – There is a कृत्-प्रत्यय ण्वुल् which affixes to धातु-s as अक and lends a meaning of doer of an action. Meaning of this प्रत्यय thus contains a linkage with कृ-धातुः. Such words are – नायकाः 1’7 पातकम् 1’38 पावकः 2’23, 10’23, 15’6 प्रकाशकम् 14’6 भयानकानि 11’27 रसात्मकः 15’13 रागात्मकम् 14’7 स्वकम् 11’50 हिंसात्मकः 18’27

Part F – There are तद्धित-प्रत्यय-s ठक् ठञ् ठन् which affix as इक, Their इक-form and their meaning seems to have relevance to कृ-धातुः.  व्यवसायात्मिका 2’41, 2’44 सात्त्विकप्रियाः 17’8 सात्त्विकम् 14’16, 17’17, 17’20, 18’20, 18’23, 18’37 सात्त्विकः 17’11, 18’9, 18’26 सात्त्विकाः 7’12, 17’4 सात्त्विकी 17’2 18’30, 18’33 सामासिकस्य 10’33

Part G – There are words referring to the family/dynasty name कुरु. Many of them are compound words starting with this family/dynasty name कुरु. It may be that this family name itself came from the characteristics of industriousness of some ancient person in the family lineage. In effect the family-name can be considered as having in its etymology derivation from कृ-धातुः. Such words are – कुरुक्षेत्रे 1’1 कुरुनन्दन 2’41, 6’43, 14’13 कुरुप्रवीर 11’48 कुरुवृद्धः 1’12 कुरुश्रेष्ठ 10’19 कुरुसत्तम 4’31 कुरून् 1’25

Part H – The word महीकृते 1’34 has कृते, which is by itself an indeclinable. It seems to have derivation from धातुः कृ, especially when noticing that it has an alternative form as कृतेन. It is used both independently and also at the end of a compound. In Apte’s dictionary – कृते कृतेन ind. (With gen. or in comp.) For, for the sake of, on account of; अमीषां प्राणानां … कृते Bh.3.36. कृते किं नास्माभिर्विगलितविवेकैः … ibid. काव्यं यशसे$र्थकृते K. P.1; Bg.1.35; Y.1.216; Ś.6.

-o-O-o-

धातुः कृ

In the श्लोकः धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेताः युयुत्सवः | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||1-1|| there is the word अकुर्वत which is directly an inflection of धातुः कृ.

अकुर्वत – धातुः कृ | तस्य अनद्यतनभूते (लङ्-लकारे) प्रथमपुरुषे बहुवचनम् |

Now धातुः कृ is detailed as –

(अ) धातुपाठसूच्याम् –

  1. कृ | भ्वा० अनिट् उ० | (कृञ् करणे)१. १०४८ ||

  2. कृ | स्वा० अनिट् उ० | कृञ् हिंसायाम् ५. ७ ||

  3. कृ | त० अनिट् उ० | डुकृञ् करणे ८. १० ||

In the context here the item (3) is relevant.

 

(आ) It is detailed in बृहद्धातुरूपावलिः as per items (2) and (3) only, at Sr. Nos. 476 and 565 respectively. It is सकर्मक transitive.

Considering that the context here is of item (3), we shall detail only कृ | त० अनिट् उ० | डुकृञ् करणे ८. १०

Because it is उभयपदी detailing is long.

 

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Footnotes –

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Footnotes –

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Note – The form अकुर्वत is given under आत्मनेपदे (३) – i.e. अनद्यतनभूते (लङ्-लकारे) प्रथमपुरुषे बहुवचनम् |

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Footnotes –

 

(इ) आपटेमहाभागस्य शब्दकोशे –

As many as 36 meanings are given for धातुः कृ when कृ | त० अनिट् उ० | डुकृञ् करणे ८. १० !!

1. To do in general तात किं करवाण्यहम्

2. To make गणिकामवरोधमकरोत् (Dk) नृपेण चक्रे युवराजशब्दभाक् (रघु. 3-35) युवराजः कृतः

3. To manufacture, shape, prepare कुम्भकारो घटं करोति

4. To build, create गृहं कुरु, मदर्थे सभां कुरु भोः

5. To produce, cause, engender रतिमुभयप्रार्थनां कुरुते (शा. 2-1)

6. To form, arrange अञ्जलिं करोति, कपोतःअस्तकं कृत्वा

7. To write, compose चकार सुमनोहरं शास्त्रम् (Pt. 1)

8.  To perform, be engaged in पूजां करोति

9. To tell, narrate इति बहुविधाः कथाः कुर्वन्

10. To carry out, execute, obey एवं क्रियते युष्मदादेशः (मालवि. 1) करिष्यामि वचस्तव

11. To bring about, accomplish, effect मत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम् (Bb 2-27)

12. To throw or to let out, discharge मूत्रं कृ To discharge urine, to make water पूरीषं कृ to void        excrement

13. To assume, put on, take स्त्रीरूपं कृत्वा, नानारूपाणि कुर्वाणः (Y 3-162)

14. To send forth, to utter मानुषीं गिरं कृत्वा, कलरवं कृत्वा

15. To place or put on (with locative) कण्ठे हारमकरोत् (K 212)

16. To entrust (with some duty), appoint अध्यक्षान् विविधान्कुर्यात्तत्र तत्र विपश्चितः (Ms 7-81)

17 To cook (as food) as in कृतान्नं

18. To think, regard, consider दृष्टिस्तृणीकृतजगत्-त्रयसत्त्वसारा (U 6-19)

19. To take (as in the hand) कुरु करे गुरुमेकमयोधनं (N 4-59)

20. To pass, spend (time) वर्षाणि दश चक्रुः, क्षणं कुरु wait a moment

21 To make sound as in खात्कृत्य, फूत्कृत्य भुङ्क्ते So, वषट्कृ, स्वाहाकृ

22. To direct towards, turn attention to, resolve on (with locative or dative) नाधर्मे कुरुते मनः (Ms, 12-118) नगरगमनाय मतिं न करोति (S 2)

23. To do a thing for another (either for his advantage or harm) यद्धनेन कृतं मयि, असौ किं करिष्यति

24. To use, employ, make use of किं तया क्रियते धेन्वा (Pt, 1)

25. To divide, break into parts (with adverbs ending in धा) द्विधा कृ to divide into two, शतधा कृ, सहस्रधा कृ &c.

26. To cause to become subject to, to reduce completely to (a particular condition, with adverbs ending in सात्) आत्मसात् कृ (रघु. 8-2) to subject or appropriate, to oneself भस्मसात् कृ to reduce to ashes

27. To appropriate, secure oneself

28 To help, give aid

29. To make liable

30. To violate, outrage (as a girl)

31. To begin

32. To order

33. To free from

34. To proceed with, to put in practice

35. To worship, sacrifice

36. To make like, consider equal to e.g. तृणी कृ

Said to be आत्मनेपदी only in the last 10 senses.

  • कृ is often used with nouns, adjectives and indeclinables to form verbs from them. For example – घनीकृ to solidify, विरलीकृ to rarefy, कृष्णीकृ to blacken, भस्मीकृ to reduce to ashes

  • कृ is of most frequent application in Sanskrit literature. Its senses are variously modified or infinitely modified, according to the noun, with which the root is connected.

    • पदं कृ to set foot आश्रमे पदं करिष्यसि (शा. 4-19)

    • क्रमेण कृतं मम वपुषि नवयौवनेन पदम् (K 147)

    • मनसा कृ to think of, meditate

    • मनसि कृ to think दृष्ट्वा मनस्येवमकरोत् (K 136)

    • चमत्कृ To cause surprise, make an exhibition or show of

    • सत्कृ To honour, treat with respect

    • वशे कृ To win over, place in subjection, subdue

Causative प्रयोजकेन (णिचि) – कारयति-ते To cause to do, to make do, to make perform

  • आज्ञां कारय रक्षोभिः (Bk 8-84)

  • भृत्यं भृत्येन वा कटं कारयति (Sk)

Desiderative इच्छार्थकम् (चिकीर्षति-ते) To wish to do (Si 14-41)

 

(ई) लकारेषु – Inflections in different moods and tenses. Obtained from  http://sanskrit.uohyd.ernet.in/scl/skt_gen/generators.html

 

परस्मैपदे

आत्मनेपदे

लट्-रूपाणि

एकवचने

द्विवचने

बहुवचने

एकवचने

द्विवचने

बहुवचने

प्रथमपुरुषः

करोति

कुरुतः

कुर्वन्ति

कुरुते

कुर्वाते

कुर्वते

मध्यमपुरुषः

करोषि

कुरुथः

कुरुथ

कुरुषे

कुर्वाथे

कुरुध्वे

उत्तमपुरुषः

करोमि

कुर्वः

कुर्मः

कुर्वे

कुर्वहे

कुर्महे

लिट्-रूपाणि

 

प्रथमपुरुषः

चकार

चक्रतुः

चक्रुः

चक्रे

चक्राते

चक्रिरे

मध्यमपुरुषः

चकर्थ

चक्रथुः

चक्र

चकृषे

चक्राथे

चकृढ्वे

उत्तमपुरुषः

चकार/चकर

चकृव

चकृम

चक्रे

चकृवहे

चकृमहे

लुट्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

कर्ता

कर्तारौ

कर्तारः

कर्ता

कर्तारौ

कर्तारः

मध्यमपुरुषः

कर्तासि

कर्तास्थः

कर्तास्थ

कर्तासे

कर्तासाथे

कर्ताध्वे

उत्तमपुरुषः

कर्तास्मि

कर्तास्वः

कर्तास्मः

कर्ताहे

कर्तास्वहे

कर्तास्महे

लृट्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

करिष्यति

करिष्यतः

करिष्यन्ति

करिष्यते

करिष्येते

करिष्यन्ते

मध्यमपुरुषः

करिष्यसि

करिष्यथः

करिष्यथ

करिष्यसे

करिष्येथे

करिष्यध्वे

उत्तमपुरुषः

करिष्यामि

करिष्यावः

करिष्यामः

करिष्ये

करिष्यावहे

करिष्यामहे

लोट्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

कुरुतात्/करोतु

कुरुताम्

कुर्वन्तु

कुरुताम्

कुर्वाताम्

कुर्वताम्

मध्यमपुरुषः

कुरुतात्/कुरु

कुरुतम्

कुरुत

कुरुष्व

कुर्वाथाम्

कुरुध्वम्

उत्तमपुरुषः

करवाणि

करवाव

करवाम

करवै

करवावहै

करवामहै

लङ्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

अकरोत्

अकुरुताम्

अकुर्वन्

अकुरुत

अकुर्वाताम्

अकुर्वत

मध्यमपुरुषः

अकरोः

अकुरुतम्

अकुरुत

अकुरुथाः

अकुर्वाथाम्

अकुरुध्वम्

उत्तमपुरुषः

अकरवम्

अकुर्व

अकुर्म

अकुर्वे

अकुर्वहि

अकुर्महि

विधिलिङ्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

कुर्यात्

कुर्याताम्

कुर्युः

कुर्वीत

कुर्वीयाताम्

कुर्वीरन्

मध्यमपुरुषः

कुर्याः

कुर्यातम्

कुर्यात

कुर्वीथाः

कुर्वीयाथाम्

कुर्वीध्वम्

उत्तमपुरुषः

कुर्याम्

कुर्याव

कुर्याम

कुर्वीय

कुर्वीवहि

कुर्वीमहि

आशीर्लिङ्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

क्रियात्

क्रियास्ताम्

क्रियासुः

कृषीष्ट

कृषीयास्ताम्

कृषीरन्

मध्यमपुरुषः

क्रियाः

क्रियास्तम्

क्रियास्त

कृषीष्ठाः

कृषीयास्थाम्

कृषीध्वम्

उत्तमपुरुषः

क्रियासम्

क्रियास्व

क्रियास्म

कृषीय

कृषीवहि

कृषीमहि

लुङ्-रूपाणि

प्रथमपुरुषः

अकार्षीत्

अकार्ष्टाम्

अकार्षुः

अकृत

अकृषाताम्

अकृषत

मध्यमपुरुषः

अकार्षीः

अकार्ष्टम्

अकार्ष्ट

अकृथाः

अकृषाथाम्

अकृढ्वम्

उत्तमपुरुषः

अकार्षम्

अकार्ष्व

अकार्ष्म

अकृषि

अकृष्वहि

अकृष्महि

 

(उ) कृदन्ताः – Verbal derivatives obtained from http://sanskrit.uohyd.ernet.in/scl/skt_gen/generators.html

 

कृदव्ययानि –

 

तुमुन्

कर्तुम्

णमुल्

कारं

क्त्वा

कृत्त्वा/कृत्वा

 

कृदन्तप्रातिपदिकानि –

 

कृत् प्रत्ययः

पुंलिङ्गम् / नपुंसकलिङ्गम्

स्त्रीलिङ्गम्

तृच्

कर्तृ

कर्त्री

तव्यत्

कर्तव्य

कर्तव्या

यक्

क्रियमाण

क्रियमाणा

शतृ

कुर्वत्

कुर्वती

शानच्

कुर्वाण

कुर्वाणा

ण्वुल्

कारक

कारिका

ण्यत्

कार्य

कार्या

क्त

कृत

कृता

क्तवतु

कृतवत्

कृतवती

अनीयर्

करणीय

करणीया

 

 

अकुर्वत is the first instance of the occurrence of धातुः कृ in श्लोकः 1-1 itself. There will be many, many instances to make us visit this धातुः कृ.

 

This detail will be accordingly updated again and again.

 

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